Legal Understanding in Physical Security
- DRASInt® Risk Alliance

- Mar 29
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एक सुरक्षा कर्मी (security guard या supervisor) का काम सिर्फ दरवाज़े पर खड़े रहना नहीं है। जब कोई घटना होती है, चोरी, हमला, झगड़ा, या कोई आपात स्थिति (emergency), तो सुरक्षा कर्मी ही सबसे पहले वहाँ पहुँचता है। इसलिए उसे यह जानना ज़रूरी है कि उस वक्त कानून क्या कहता है, उसे क्या करना चाहिए, और क्या नहीं करना चाहिए। अगर सुरक्षा कर्मी को कानून की जानकारी नहीं होगी, तो वह खुद मुसीबत में पड़ सकता है, चाहे उसकी नीयत कितनी भी अच्छी हो। इसलिए यह पाठ सरल भाषा में बताता है कि भारत के नए कानून क्या हैं और उनका सुरक्षा के काम से क्या सीधा संबंध है।

BNS और BNSS
1 जुलाई 2024 से भारत में दो बहुत बड़े बदलाव हुए। पुराने अंग्रेज़ी ज़माने के कानूनों की जगह नए भारतीय कानून आए।
पहले था भारतीय दंड संहिता यानी Indian Penal Code (IPC), जो सन् 1860 में बना था। अब उसकी जगह आई है भारतीय न्याय संहिता जिसे हम BNS कहते हैं। यह कानून बताता है कि कौन सा काम अपराध (crime) है और उसकी सज़ा क्या होगी। इसे Substantive Law यानी मूल कानून भी कहते हैं।
दूसरे, पहले था दंड प्रक्रिया संहिता यानी Code of Criminal Procedure (CrPC), जो 1973 में बना था। अब उसकी जगह आई है भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता जिसे हम BNSS कहते हैं। यह कानून बताता है कि जाँच (investigation) और मुकदमा (trial) कैसे चलेगा। इसे Procedural Law यानी प्रक्रिया का कानून भी कहते हैं।
इन नए कानूनों का मकसद है कि न्याय जल्दी मिले, तकनीक का इस्तेमाल हो जैसे video recording और e-FIR, और पीड़ित (victim) को बेहतर सुरक्षा मिले।
BNS की ज़रूरी धाराएँ (Sections)
BNS की धारा 111 संगठित अपराध (organized crime) के बारे में है। इसका मतलब है जब कोई गिरोह (gang) मिलकर गंभीर अपराध करे, जैसे कि cyber attack, जबरन वसूली (extortion), या कंपनी की मशीनों को नुकसान पहुँचाना। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई criminal group किसी factory के computer system पर हमला करे या plant managers को धमकी दे, तो यह धारा 111 के तहत आएगा।
BNS की धारा 112 छोटे संगठित अपराधों (petty organized crime) के बारे में है। जैसे कि workers का एक group मिलकर warehouse से बार-बार spare parts चुराए, यह इस धारा के अंतर्गत आएगा।
BNS की धारा 61 criminal conspiracy यानी आपराधिक षड्यंत्र के बारे में है। जब दो या ज़्यादा लोग मिलकर कोई गलत काम करने की योजना बनाएँ। उदाहरण के लिए, दो contractors मिलकर fake maintenance bills बनाने की साज़िश करें।
BNS की धारा 57 abetment यानी उकसावे के बारे में है। जब कोई भीड़ किसी के कहने पर अपराध करे, जैसे कि किसी union leader के कहने पर भीड़ factory की machinery तोड़े।
BNS की धारा 106 लापरवाही (negligence) से मृत्यु के बारे में है। अगर किसी की लापरवाही से किसी की जान चली जाए, तो वह इस धारा के तहत दोषी होगा।
BNSS की ज़रूरी धाराएँ
BNSS की धारा 173(3) कहती है कि FIR दर्ज होने के बाद preliminary enquiry यानी प्रारंभिक जाँच 14 दिन के अंदर पूरी होनी चाहिए। इसलिए जब कोई घटना हो, जैसे कंपनी के laptops चोरी हों, तो सुरक्षा कर्मी को जल्दी और सही report करनी चाहिए ताकि पुलिस समय पर काम कर सके।
BNSS की धारा 105 कहती है कि जब police किसी जगह की तलाशी (search) ले और सामान ज़ब्त (seize) करे, तो उसकी video recording करना अनिवार्य है। इसलिए अगर police आपकी company में search करने आए, तो उन्हें video बनाने दें और खुद भी cooperate करें।
BNSS की धारा 185 कहती है कि ज़रूरी situation में police बिना warrant के भी search कर सकती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी worker के locker में explosives होने का शक हो तो तुरंत बिना देर किए तलाशी ली जा सकती है।
BNSS की धारा 193(3)(ii) कहती है कि जो व्यक्ति पीड़ित है (victim), उसे case की progress के बारे में बताते रहना होगा। इसका मतलब यह है कि अगर कोई employee harassment की शिकायत करे, तो HR और security team को उसे update देते रहना चाहिए।
BNSS की धाराएँ 47 और 48 गिरफ्तारी (arrest) के दौरान व्यक्ति के अधिकारों के बारे में हैं। जब कोई arrest हो, तो उसे बताना होगा कि उसे क्यों पकड़ा जा रहा है, और उसे legal help पाने का अधिकार है। Security guard का काम है कि जब तक police न आए, वह इन बातों का ध्यान रखे।
अपराध को समझना
अपराध और दीवानी मामले में फ़र्क
अपराध (crime) वह होता है जिसे society यानी समाज के खिलाफ़ माना जाता है। इसमें सरकार की तरफ से case चलाया जाता है और सज़ा जेल या जुर्माना हो सकती है। उदाहरण के लिए, factory से copper wire चुराना एक crime है।
दीवानी मामला (civil case) तब होता है जब किसी एक व्यक्ति या company को दूसरे से नुकसान हुआ हो। इसमें जेल नहीं होती लेकिन compensation यानी मुआवज़ा देना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, कोई vendor contract के मुताबिक machinery न दे, यह civil matter है।
एक और उदाहरण से समझें: अगर security guard किसी trespasser पर ज़रूरत से ज़्यादा force use करे, तो यह criminal case बन सकता है। लेकिन अगर guard की लापरवाही से किसी visitor की गाड़ी को नुकसान पहुँचे, तो यह civil matter होगा।
अपराध के दो ज़रूरी तत्व
किसी भी काम को criminal offence मानने के लिए दो चीज़ें एक साथ होनी चाहिए। पहला है Mens Rea यानी guilty mind यानी दोषी इरादा। इसका मतलब है कि व्यक्ति ने जानबूझकर वह काम किया। जैसे कि कोई worker जानबूझकर safety alarm बंद करे, उसमें Mens Rea है।
दूसरा है Actus Reus यानी guilty act यानी वह गलत काम खुद करना। जैसे कि manager ने धोखाधड़ी की जानकारी छुपाई, यह Actus Reus है। दोनों का एक साथ होना ज़रूरी है। हालाँकि कुछ मामलों में, जिन्हें strict liability offences कहते हैं, इरादे की ज़रूरत नहीं होती। उदाहरण के लिए, अगर कोई company pollution फैलाए, तो चाहे उसने जानबूझकर किया हो या न किया हो, वह ज़िम्मेदार मानी जाएगी।
लापरवाही, Negligence
Negligence का मतलब है वह काम न करना जो एक समझदार और ज़िम्मेदार इंसान करता। जब किसी की लापरवाही से किसी को नुकसान होता है, तो वह कानूनी रूप से ज़िम्मेदार होता है। BNS की धारा 106 के अनुसार, अगर लापरवाही से किसी की मृत्यु हो जाए तो यह criminal offence है।
Chemicals को गलत तरीके से store करने से factory में blast हो जाए, या fire safety audit को नज़रअंदाज़ करने से आग लग जाए, दोनों negligence के मामले हैं। Security guard अगर duty पर सो जाए और उस दौरान चोरी हो जाए, यह भी negligence है। सबसे गंभीर मामला: अगर किसी trespasser को गलत तरीके से काबू करने से उसकी मौत हो जाए, तो guard पर BNS की धारा 106 लग सकती है।
व्यक्ति के विरुद्ध अपराध
यह भाग उन अपराधों के बारे में है जो किसी व्यक्ति को शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुँचाते हैं। Security professionals को इनकी पहचान करना ज़रूरी है।
चोट और गंभीर चोट, BNS धारा 114, 115, 116 और 117
BNS की धारा 114 के अनुसार, Hurt यानी साधारण चोट का मतलब है किसी को शारीरिक दर्द, बीमारी या weakness पहुँचाना। धारा 115 बताती है कि जानबूझकर चोट पहुँचाना punishable है। BNS की धारा 116 में Grievous Hurt यानी गंभीर चोट की परिभाषा है, जिसमें शामिल हैं: हाथ या पैर गँवाना, हड्डी टूटना, आँख या कान की रोशनी/सुनाई जाना, या कोई ऐसी चोट जो 15 दिन से ज़्यादा गंभीर तकलीफ दे। धारा 117 इसकी सज़ा बताती है।
कोई worker faulty machine में फँस जाए और उसका हाथ बुरी तरह घायल हो जाए, यह grievous hurt है और BNS धारा 116/117 के तहत आएगा।
आपराधिक बल और हमला, BNS धारा 129 और 130
BNS की धारा 129 Criminal Force के बारे में है, किसी पर बिना उसकी मर्ज़ी के जानबूझकर force use करना ताकि उसे नुकसान हो या परेशानी हो। धारा 130 Assault के बारे में है, force use करने की कोशिश या धमकी जिससे दूसरे को डर लगे। अगर कोई senior manager किसी employee को जानबूझकर धक्का दे या उसे इस तरह से डराए कि उसे physical harm का डर लगे, यह BNS धारा 129 या 130 के तहत criminal force या assault होगा।
अवैध कारावास, BNS धारा 127
BNS की धारा 127 Wrongful Confinement के बारे में है, किसी व्यक्ति को उसकी मर्ज़ी के बिना किसी जगह बंद रखना या उसकी आज़ादी पूरी तरह छीनना। (धारा 126 Wrongful Restraint के बारे में है, जब movement को partially रोका जाए।) अगर कंपनी management किसी employee को labour dispute के दौरान office में जबरदस्ती रोके रखे, या security guard किसी को बिना authority के बंद कर दे, यह BNS धारा 127 के तहत wrongful confinement होगा और guard खुद दोषी बन जाएगा।
अपहरण, BNS धारा 137 और 138
BNS की धारा 137 Kidnapping के बारे में है, किसी को जबरदस्ती या बहाने से उठा ले जाना। धारा 138 Abduction के बारे में है, जिसमें force या deceit यानी धोखे का इस्तेमाल होता है। अगर कोई rival company किसी employee को trade secrets निकलवाने के लिए झूठे बहाने से किसी जगह ले जाए, यह BNS धारा 138 के तहत abduction होगा।
चोरी और डकैती, BNS धारा 303 और 309
BNS की धारा 303 Theft यानी चोरी के बारे में है, किसी की movable property को बेईमानी से लेना, बिना उसकी इजाज़त के। BNS की धारा 309 Robbery यानी डकैती के बारे में है, जिसमें theft के साथ-साथ violence यानी हिंसा या धमकी भी शामिल होती है। कंपनी के laptops, confidential documents, या cash चुराना BNS धारा 303 के तहत theft है। अगर guard खुद ही corporate assets चुराते समय force का इस्तेमाल करे, तो यह BNS धारा 309 के तहत robbery बन जाता है।
हत्या और गैर-इरादतन हत्या, BNS धारा 100, 101 और 103
BNS की धारा 100 Culpable Homicide यानी गैर इरादतन हत्या के बारे में है, जब मृत्यु होती है लेकिन पूरा murder का इरादा नहीं था। BNS की धारा 101 Murder यानी हत्या के बारे में है, जब कोई जानबूझकर, पूरी सोच समझ के साथ किसी की जान लेता है। धारा 103 murder की सज़ा बताती है, जो death penalty या life imprisonment है। अगर safety standards की जानबूझकर अनदेखी की जाए और उससे किसी की मौत हो, या labour dispute में अत्यधिक हिंसा हो जिससे मृत्यु हो जाए। Negligence यानी लापरवाही से मृत्यु के मामले BNS धारा 106 के तहत आते हैं।
अधिकार और बचाव के तरीके
निजी प्रतिरक्षा का अधिकार, BNS धारा 34 से 44
BNS की धारा 34 से 44 के अनुसार, हर व्यक्ति को अपनी जान और संपत्ति की रक्षा करने का अधिकार है। (पुराने IPC में यह धारा 96 से 106 में था, BNS में इसे renumber करके धारा 34 से 44 किया गया है।) Security guard को भी यह अधिकार है। अगर कोई व्यक्ति company की property चुरा रहा हो, या आप पर physically attack कर रहा हो, तो आप उसे रोकने के लिए reasonable force यानी उचित बल का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन यह अधिकार तब तक ही है जब तक खतरा बना हुआ है, जैसे ही खतरा खत्म हो, force रोकनी होगी।
Proportionate Force, सही मात्रा में बल
यह सबसे ज़रूरी concept है। Force हमेशा situation के हिसाब से होनी चाहिए, न कम, न ज़्यादा।
Proportionate Force का मतलब है वही बल जो ज़रूरी हो। उदाहरण के लिए, अगर कोई हाथापाई कर रहा हो तो उसे शारीरिक रूप से रोका जा सकता है। लेकिन अगर वह बस verbal argument कर रहा हो, तो उस पर physical force का इस्तेमाल करना Disproportionate Force होगी, जो खुद आपको criminal बना देगी। इसलिए guard को हमेशा यह सोचना है, क्या इतनी force की वाकई ज़रूरत थी? अगर जवाब 'ना' है, तो रुक जाना चाहिए।
आत्म-संरक्षण, Emergency में वैध कार्य
किसी emergency में जान या property बचाने के लिए किए गए काम कानूनन जायज़ माने जाते हैं। जैसे अगर factory में fire लग जाए, तो employees भागने के लिए दरवाज़ा तोड़ सकते हैं, यह illegal नहीं होगा। Emergency response team किसी खतरनाक situation को control करने के लिए तेज़ कार्रवाई कर सकती है।
नशा और मानसिक स्थिति
अगर कोई व्यक्ति अपनी मर्ज़ी से नशा (voluntary intoxication) करके अपराध करे, तो उसे कानूनी छूट नहीं मिलती, वह दोषी माना जाएगा। BNS की धारा 24 इसे cover करती है। लेकिन अगर नशा उसकी मर्ज़ी के बिना हुआ हो, जैसे किसी दवा के side effect से, तो BNS की धारा 23 के तहत यह defence के रूप में काम आ सकता है।
Incitement, दूसरों को उकसाना, BNS धारा 45 से 60
BNS की धारा 45 से 60 abetment यानी उकसावे के बारे में हैं। अगर कोई व्यक्ति दूसरों को अपराध करने के लिए उकसाए, तो वह भी दोषी है, चाहे उसने खुद crime न किया हो। उदाहरण: अगर कोई supervisor अपने साथियों को company की property नुकसान पहुँचाने के लिए भड़काए, तो वह supervisor भी legally guilty है।
गिरफ्तारी, शिकायत और FIR की प्रक्रिया
BNSS की धारा 35 से 60 arrest के बारे में हैं। Arrest का मतलब है किसी suspected person को legally custody में लेना। यह काम police का है। Security guard का काम है कि वह व्यक्ति को तब तक रोके रखे जब तक police न आ जाए, लेकिन उस दौरान उसके साथ सही व्यवहार हो, उसे बेवजह hurt न किया जाए, और BNSS की धारा 47 और 48 के तहत उसके basic rights का पालन हो।
Complaint वह होती है जो कोई व्यक्ति किसी घटना की formal जानकारी management या police को देता है। FIR यानी First Information Report वह होती है जो police किसी cognizable crime की जानकारी पर officially दर्ज करती है। Security professional का काम है, घटना की सही और समय पर report करना ताकि FIR दर्ज हो सके।
Burden of Proof यानी सबूत का बोझ prosecution यानी अभियोजन पक्ष पर होता है। उन्हें यह साबित करना होता है कि आरोपी ने crime किया, और वह भी beyond reasonable doubt यानी बिना किसी उचित संदेह के। इसका मतलब है कि सुरक्षा कर्मी को अच्छे और clear सबूत collect करने और preserve करने में मदद करनी चाहिए।
Legal Aid का मतलब है मुफ्त कानूनी सहायता। जो लोग वकील का खर्च नहीं उठा सकते, उन्हें सरकार की तरफ से कानूनी मदद मिलती है। अगर कोई contract worker घटना में injured हो जाए, तो उसे legal aid का अधिकार है।
PSARA 2005
Private Security Agencies Regulation Act यानी PSARA 2005 एक बहुत ज़रूरी कानून है जो पूरे भारत में सभी private security agencies पर लागू होता है।
PSARA क्यों बना?
इस कानून का मकसद है कि private security industry में एक standard बने। हर agency professionally काम करे, guards को proper training मिले, और जो गलत काम करे उसे सज़ा मिले। इससे public safety बेहतर होती है और agencies की accountability यानी जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
PSARA किन पर लागू होता है?
यह कानून उन सभी agencies पर लागू होता है जो physical security यानी guards और patrols देती हैं, electronic security जैसे CCTV और alarm systems provide करती हैं, या cash-in-transit यानी पैसे की सुरक्षित ढुलाई का काम करती हैं। इस कानून से बाहर हैं, army, police, government security personnel, और बिना fee के दी जाने वाली voluntary security services।
License, लाइसेंस लेना अनिवार्य है
कोई भी private security agency बिना license के काम नहीं कर सकती। License लेने के लिए आवेदक को Indian citizen या Indian company होना ज़रूरी है। अगर कोई व्यक्ति किसी गंभीर crime में दोषी हो, terrorism से जुड़ा हो, सरकारी नौकरी से misconduct के कारण बर्खास्त हुआ हो, या दिवालिया हो, तो वह license के लिए apply नहीं कर सकता।
License State level पर Controlling Authority देती है। एक district के लिए 5,000 रुपए शुल्क है, 2 से 5 districts के लिए 10,000 रुपए, और पूरे state के लिए 25,000 रुपए। License की validity आमतौर पर 5 साल की होती है और इसे expire होने से कम से कम 45 दिन पहले renew कराना होता है।
Agencies की ज़िम्मेदारियाँ
एक licensed agency की ज़िम्मेदारी है कि वह सिर्फ trained और verified guards को रखे। हर guard का पूरा record रखा जाए जिसमें उसकी पहचान, background verification, और training certificate शामिल हों। Guard हर समय proper uniform और ID card पहने। कोई भी criminal या suspicious activity तुरंत authorities को बताई जाए। Labour laws, wages, और insurance का पूरा पालन हो।
Guards के लिए Training, PSARA की असली ज़रूरत
PSARA के Central Model Rules 2020 के अनुसार, हर security guard को कम से कम 160 घंटे की training लेनी अनिवार्य है। इसमें 100 घंटे classroom instruction यानी कक्षा में पढ़ाई और 60 घंटे field training यानी मैदानी अभ्यास शामिल है। यह training कम से कम 20 working days में पूरी होनी चाहिए।
Training में शामिल विषय हैं, physical fitness, fire safety, first aid, crowd control यानी भीड़ नियंत्रण, emergency handling, और बुनियादी कानूनी प्रावधानों की जानकारी। जो guards पहले army, navy, air force, या police में रह चुके हैं यानी ex-servicemen हैं, उनके लिए training कम है, कम से कम 40 घंटे classroom और 16 घंटे field training।
PSARA के तहत दंड, PSARA Act की धारा 20
PSARA Act की धारा 20(1) के अनुसार, अगर कोई agency बिना license के काम करे तो उस पर 25,000 रुपए तक जुर्माना हो सकता है या 1 साल तक की जेल हो सकती है, या दोनों। यह ध्यान देना ज़रूरी है कि जुर्माना 25,000 रुपए है, 50,000 नहीं, और जेल 1 साल है, 3 साल नहीं।
अगर कोई guard या supervisor police या armed forces जैसी वर्दी पहने, तो उस guard और agency के मालिक दोनों पर 5,000 रुपए तक जुर्माना या 1 साल तक की जेल हो सकती है। Untrained या rules का उल्लंघन करने वाली agency का license suspend या cancel किया जा सकता है। False documents पर legal action होता है। अगर weapons का misuse हो तो Arms Act के तहत अलग से criminal prosecution होती है।
हथियार और शस्त्र का कानून
यह एक बहुत ज़रूरी विषय है जिसे बहुत से security professionals गलत समझते हैं। इसलिए इसे ध्यान से पढ़ें।
क्या PSARA license होने से guard हथियार रख सकता है?
नहीं, और यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। PSARA agency को regulate करता है, weapons को नहीं। PSARA किसी guard को हथियार रखने का automatic right नहीं देता। भारत सरकार ने यह बात Supreme Court के सामने भी माना है कि private security guards को बिना Arms Act license के हथियार रखने का कोई special right नहीं है।
तो फिर हथियार कैसे रखें?
हथियार रखने का अधिकार Arms Act 1959 यानी शस्त्र अधिनियम से आता है। इस Act की धारा 3 कहती है कि कोई भी व्यक्ति बिना valid license के firearm या ammunition नहीं रख सकता, खरीद नहीं सकता, या ले जा नहीं सकता। Arms Act की धारा 25 के तहत बिना license के हथियार रखना 7 साल तक की जेल का अपराध है।
License personal होता है, यानी यह individual guard के नाम पर होता है, agency के नाम पर नहीं। License में यह भी लिखा होता है कि कौन सा हथियार रखा जा सकता है। इसलिए एक legally armed security guard वही है जिसके पास दोनों हों, PSARA-registered agency का हिस्सा हो, और साथ ही अपना personal Arms Act license भी हो।
हथियार रखने पर और क्या restrictions हैं?
License होने के बाद भी guard को कुछ नियमों का पालन करना होता है। License demand पर दिखाना होगा। Prohibited arms यानी जो हथियार license में नहीं हैं, वे नहीं रखे जा सकते। कुछ public places या notified areas में armed होकर नहीं जाया जा सकता। अगर हथियार खो जाए या चोरी हो जाए, तो तुरंत report करना होगा।
हथियार का इस्तेमाल कब जायज़ है?
License होने का मतलब यह नहीं कि guard जब चाहे fire कर सकता है। हथियार का उपयोग केवल तब जायज़ है जब अपनी जान खतरे में हो या किसी गंभीर crime को रोकना हो, और तब भी वह force proportionate यानी situation के अनुसार होनी चाहिए। अगर कोई guard बिना ज़रूरत के या routine patrolling में हथियार का इस्तेमाल करे, तो उस पर criminal case बन सकता है, भले ही उसके पास license हो।
वर्दी और पहचान ऐसी न रखें जो police जैसी लगे, यह PSARA में साफ मना है। Guard को police का रुतबा नहीं मिला है, इसलिए उस तरह की कोई भी पहचान गैरकानूनी है।
मुख्य बातें

1 जुलाई 2024 से भारत में नए कानून लागू हुए, BNS और BNSS। इन्हें जानना सुरक्षा कर्मी के लिए ज़रूरी है क्योंकि घटनाओं की reporting, जाँच में मदद, और कानूनी अधिकार, सब इन्हीं कानूनों के तहत होते हैं।
अपराध के लिए इरादा (Mens Rea) और कार्य (Actus Reus), दोनों ज़रूरी हैं। लापरवाही (negligence) भी BNS धारा 106 के तहत अपराध बन सकती है, इसलिए duty को seriously लेना चाहिए।
चोट (BNS धारा 114/115), गंभीर चोट (BNS धारा 116/117), आपराधिक बल (BNS धारा 129), हमला (BNS धारा 130), अवैध कारावास (BNS धारा 127), चोरी (BNS धारा 303), डकैती (BNS धारा 309), अपहरण (BNS धारा 137/138), ये सब criminal offences हैं। Security professional को इन्हें पहचानना और तुरंत सही authority को report करना आना चाहिए।
Self-defence यानी निजी प्रतिरक्षा का अधिकार BNS धारा 34 से 44 के तहत है, लेकिन force हमेशा proportionate होनी चाहिए। ज़रूरत से ज़्यादा force आपको खुद criminal बना सकती है।
PSARA 2005 के अनुसार हर private security agency को license लेना ज़रूरी है। सभी guards को minimum 160 घंटे की training अनिवार्य है (ex-servicemen के लिए 56 घंटे)। बिना license के काम करने पर PSARA धारा 20 के तहत 25,000 रुपए जुर्माना या 1 साल जेल हो सकती है।
और सबसे ज़रूरी बात, PSARA license होने से हथियार रखने का अधिकार नहीं मिलता। इसके लिए Arms Act 1959 की धारा 3 के तहत personal license ज़रूरी है। बिना Arms Act license के हथियार रखना धारा 25 के तहत 7 साल तक की जेल का अपराध है।
"एक अच्छा security professional वही है जो अपना काम कानून के दायरे में रहकर करे, इससे वह खुद भी सुरक्षित रहता है और दूसरों को भी।"
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